तू ही मेरी इबादत
★ तू ही मेरी इबादत ★ मैं ढूँढूँ दुनिया में खुद को, जैसे कोई पर्वत खड़ा, तू मिल जाए तो लगता है, मेरा सफर बस अब है बढ़ा, वो पत्थर जैसी सीने की धड़कन, तुझसे ही मचलती है, तेरे आँचल की छाँव मिले तो, रूह मेरी संभलती है, तू है सुकून मेरा, तू ही है मेरा हर रास्ता, तू शक्ति मेरी, तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...! सजे हों छप्पन भोग भले, महकती हो ये थालियाँ, तेरे बिना फीकी लगती हैं, ये सब रंग-बिरंगी खुशियाँ, जैसे कान्हा को तुलसी भाए, बिन उसके भोग अधूरा है, तेरा साथ न हो जो साथ मेरे, तो जग ये सब कोरा है, तू सावन की पहली बूंद, मैं प्यासी जमीं का रास्ता, तू शक्ति मेरी, तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...! दुनिया की तलवारें लेकर, मैंने तो जग को जीत लिया, पर तुझसे जो एक लफ्ज़ सुना, मैंने खुद को जीत लिया, बड़े-बड़े सम्राट झुके, जो तेरी आँखों के आगे, जीत का असली गहना तो, बस तेरी सादगी में जागे, तू ही मेरी जीत की मंजिल, तू ही मेरा इकलौता राब्ता, तू शक्ति मेरी, तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...! एक तू है, जो कर्म की राह में, मेरी ढाल बन जाती है, एक मैं हूँ, जो श्रद्धा में तेरी, खुद को भूल जाता हूँ, ये सृष्टि क...