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तू ही मेरी इबादत

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  ★ तू ही मेरी इबादत ★ मैं ढूँढूँ दुनिया में खुद को, जैसे कोई पर्वत खड़ा, तू मिल जाए तो लगता है, मेरा सफर बस अब है बढ़ा, वो पत्थर जैसी सीने की धड़कन, तुझसे ही मचलती है, तेरे आँचल की छाँव मिले तो, रूह मेरी संभलती है, तू है सुकून मेरा, तू ही है मेरा हर रास्ता, तू शक्ति मेरी, तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...! सजे हों छप्पन भोग भले, महकती हो ये थालियाँ, तेरे बिना फीकी लगती हैं, ये सब रंग-बिरंगी खुशियाँ, जैसे कान्हा को तुलसी भाए, बिन उसके भोग अधूरा है, तेरा साथ न हो जो साथ मेरे, तो जग ये सब कोरा है, तू सावन की पहली बूंद, मैं प्यासी जमीं का रास्ता, तू शक्ति मेरी, तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...! दुनिया की तलवारें लेकर, मैंने तो जग को जीत लिया, पर तुझसे जो एक लफ्ज़ सुना, मैंने खुद को जीत लिया, बड़े-बड़े सम्राट झुके, जो तेरी आँखों के आगे, जीत का असली गहना तो, बस तेरी सादगी में जागे, तू ही मेरी जीत की मंजिल, तू ही मेरा इकलौता राब्ता, तू शक्ति मेरी, तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...! एक तू है, जो कर्म की राह में, मेरी ढाल बन जाती है, एक मैं हूँ, जो श्रद्धा में तेरी, खुद को भूल जाता हूँ, ये सृष्टि क...
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मेरा बिलासपुर

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★ मेरा बिलासपुर ★ अरपा की ये लहरें देखो, जैसे गीत सुनाती हैं, बिलासपुर की माटी हम पर, स्नेह सदा बरसाती है, धीमी-धीमी शाम यहाँ की, दिल को सुकून दे जाती है, शहर की ये हलचल भी, एक राग नया गाती है...! रतनपुर की पावन छाया, मन में विश्वास जगाती है, माँ महामाया के चरणों में, दुनिया झुकने आती है, खूंटाघाट की शांत झील, दर्पण सी जो दिखती है, सूरज की उन किरणों में, यादें नई-नई खिलती है...! कानन पेंडारी की गलियों में, बचपन आज भी खेलता है, शहर के कोने-कोने में, अपनापन ही मिलता है, गांधी चौक की रौनक देखो, जैसे धड़कन धड़कती है, बिलासपुर की शाम यहाँ पर, सितारों सी चमकती है...! बिलासा ताल की लहरों में, शहर का अक्स उभरता है, सुकून भरी उन शामों में, मन हर पल निखरता है, शांत जल की गहराई में, खुशियाँ जैसे बहती हैं, बिलासा की गौरव गाथाएं, हवाएं यहाँ की कहती हैं...! विकास के इन रास्तों पर, हम आगे बढ़ते जाते हैं, पर अपनी पुरानी यादों को, सीने से लगाए रखते हैं, सिर्फ एक शहर नहीं ये, ये रूह का एक ठिकाना है, बिलासपुर ही अपना घर है, यहीं उम्र भर मुस्कुराना है...! 🙏 जय हिंद 🙏  आपका अपना  अहसास डायरी ✍️...

देवदूत का दूसरा नाम - डॉक्टर

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  ★देवदूत का दूसरा नाम★ सफेद कोट में छिपी सादगी, आँखों में विश्वास है, मरीज़ की हर एक धड़कन का, उन्हें गहरा एहसास है, ईश्वर का रूप बनकर, जो जीवन की डोर थामते हैं, मौत के पंजे से खींचकर, जो खुशियाँ वापस लाते हैं...! शल्य क्रिया के सूक्ष्म कौशल से, जो जीवन को नया आकार देते हैं, चीरे के उस निशान में भी, वे उम्मीदों के फूल भर देते हैं...! आधी रात हो या दिन का उजाला, वे सदा तत्पर रहते हैं, दूसरों के दर्द को समझकर, वे धैर्य का पाठ पढ़ते हैं, न थकते हैं, न रुकते हैं, सेवा ही जिनका धर्म है, मानवता के इस महायुद्ध में, वे ही सबसे बड़े रक्षक हैं...! जब उम्मीदें टूटने लगती हैं, और थक जाता है सारा संसार, तब वे हाथ बढ़ाते हैं बनकर, एक अटूट सहारा और प्यार, नमन है उन हाथों को, जिनमें स्वास्थ्य का वरदान है, सच्चे अर्थों में डॉक्टर ही, इस धरा की असली शान हैं...! 🙏 जय हिंद 🙏  आपका अपना  अहसास डायरी ✍️  ● क्या कभी किसी डॉक्टर ने आपकी या आपके परिवार की उम्मीद तब जगाई जब सब हार मान चुके थे ? ● निस्वार्थ सेवा करने वाले डॉक्टरों के लिए आप कमेंट में 'थैंक यू' या कोई प्यारा संदेश लिखना चाहेंगे ...

चेहरे का लिबास

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 ★ चेहरे का लिबास ★ दुनिया को दिखाने को चेहरे पर नक़ाब है, मेरे अंदर एक दरिया-ए-दर्द बेहिसाब है, झाँक कर जो देखोगे, रूह कांप जाएगी, हर सांस में एक अनकही प्यास उभर आएगी...! खुदा! अब तो सब्र का पैमाना भर गया है, सीने में दबा दर्द, एक पत्थर सा ठहर गया है, ये वो ज़हर है जिसे ख़ामोशी से पीते हैं हम, तन्हाइयों के साये में, रोज़ ही जीते हैं हम...! परछाई से भी अब तो डरने लगे हैं ख़ुद से, राहत की तलाश में, गुज़रते हैं मुद्दत से, ख्वाहिश थी कि परिंदों सी ऊँची उड़ान भरूँ, ज़िंदगी की कड़वाहट को हंसी में बदलूँ...! मगर यादों की धूल ने रास्तों को घेर लिया है, मायूसी की धूप ने खुशियों को फेर लिया है, वो सावन के रंगों सा, रूह में समाया जो था, जिसने खिलती कलियों सा, मन को सजाया जो था...! ऐ खुदा! उस मुसाफिर को मेरी बंजर ज़मीं पर ला दे, मेरी फीकी पड़ी रूह में, फिर से रंग सजा दे, बहुत भारी है ये हँसी, अब ये बोझ सहा न जाए, मेरी खाली झोली में, वो ख़ुशियाँ फिर लौट आए...! 🙏 जय हिंद 🙏 आपका अपना  अहसास डायरी ✍️  ● क्या आपने कभी ऐसा नकाब पहना है ? ● क्या आप भी खामोशी से दर्द सहते हैं ? ● तन्हाई आपको क्या सि...

बेनाम इबादत

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  ★ बेनाम इबादत ★ कहाँ रस्मों की बेड़ियों में, कभी प्यार बाँधा जाता है, दुनिया के डर से अक्सर, हर रिश्ता निभाया जाता है, पर असली इबादत तो, उस बेनाम मोहब्बत में है, जहाँ सिंदूर नहीं, बस रूह से रूह का नाता है...! मैं जानती हूँ, एक छत के नीचे हम रह नहीं सकते, तकदीर की लकीरों को, हम कभी मिटा नहीं सकते, पर हर दुआ में तेरा भला, माँगना दस्तूर है मेरा, वो रिश्ता है जिसे मैं, ज़माने को दिखा नहीं सकती...! दूरी कितनी भी हो, फिर भी एहसास हमेशा पास रहता है, बिना किसी हक के भी, वफा का प्यास रहता है, किसी कागज़ की मोहर की, मोहताज नहीं हूँ मैं, तेरी यादों का ही दिल में, अब स्थाई वास रहता है...! सजोया है उस रिश्ते को, जिसे कोई नाम न मिला, महक उठी वो बगिया मेरी, जिसे मंज़िल कभी न मिली, यही तो वो सुकून है, जो हर किसी को नसीब नहीं, तड़प में भी वो मज़ा है, जो किसी आराम में न मिला...! न फेरों के बंधन हैं, न समाज की गवाही है, पर मेरी हर धड़कन में, बस तेरी ही परछाई है, लोग ढूँढते होंगे मंज़िलें, अपनी मोहब्बत की, मैंने तो तेरी यादों में ही, अपनी दुनिया बसाई है...! 🙏 जय हिंद 🙏  आपका अपना  अहसास ...

नारी: सृष्टि का आधार

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★   नारी: सृष्टि का आधार ★ तुम मात्र कोमल देह नहीं, तुम आदि शक्ति का मान हो, इस नीरस सूनी धड़कन में, तुम ही तो जीवन-प्राण हो, तुम केवल घर की शोभा नहीं, तुम जग का आधार बनी हो, तुम काल की गति को मोड़ने वाली, एक सुंदर अवतार बनी हो...! कभी माँ बनकर आँचल से, तुमने ममता को सींचा है, कभी बहन बन रक्षा-सूत्र से, भाई का भाग्य निखारा है...! कभी पत्नी बन हर बाधा में, तुमने साथ निभाया है, हर रिश्ते की तपती धूप में, तुम शीतल साया बन आई हो...! तुमने बाधाओं को चीरा है, नभ में अपने पर फैलाए हैं, कल तक जो बंद दरवाजे थे, वहाँ आज तुम्हारे साये हैं, तुम गिरकर फिर संभलना जानती हो, तुम तपकर सोना भी बनती हो, जो हार न माने कभी पथ पर, तुम वो अटूट नियति हो...! क्यों बाँधें तुम्हें एक दिन में, हर दिन ही तुम्हारा सम्मान रहे, तेरे चरणों की धूल जहाँ हो, वह आँगन स्वर्ग समान रहे, नारी तुम केवल नाम नहीं, तुम सृजन का पूरा संसार हो, इस सृष्टि की हर एक धड़कन का, तुम ही तो असली सार हो...! इसी से महकता घर-आँगन, इसी से जग की शान है, जहाँ मिले स्नेह और आदर इसे, वहाँ देवों का वास होता है, नारी के बिना तो ये संसार, बस मिट्टी ...

दिखावे का मेला - विवाह

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★ दिखावे का मेला - विवाह ★ यह मिलन है दो रूहों का, या बाज़ार की मंडी है ? आजकल की हर शादी में, दिखावे की गूँज तगड़ी है, लाखों लुटाकर कार्ड छपे, सजे फूलों से द्वार हैं, पर रिश्तों की नींव में देखो, खोखलेपन के तार हैं...! दहेज को 'हक' का नाम देकर, मांगते बड़ी शान से, जो खुद को ऊँचा बताते हैं, वो दूर अपनी पहचान से, वह मंडप की चमक-धमक, और रोशनी का शोर है, किराए के इन मेहमानों का, जमा हुआ यह दौर है...! प्री-वेडिंग के फोटोशूट में, बस इश्क का अभिनय होता है, कैमरे के सामने चेहरा, हँसता और मुस्कुराता होता है, दहलीज घर की लांघते ही, सब रंग फीके पड़ जाते हैं, सोशल मीडिया की चमक में, असली दर्द छुप जाते हैं...! दिखावे की इस दौड़ में, सादगी कहीं खो गई, रिश्तों की रूह मर चुकी, रस्में बस औपचारिकता हो गई, करोड़ों फूँक कर भी यहाँ, सुकून कहीं न मिलता है, क्योंकि दिखावे का ये जहर, हर रिश्ते को छलता है...! सोचो ज़रा ऐ इंसान तुम, क्या ये सब ज़रूरी है ? दिखावे की इस चमक में, रिश्तों की तबाही पूरी है, फालतू के इन खर्चों को, अगर अपनों पर लगाया जाए, तो सादगी के उस बंधन में, उम्र भर का साथ पाया जाए...! ...