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बेरोजगार हूं मै

 


बेरोजगार हूं मैं

बेरोजगार हूं, सपने बेचता हूं मै,

ना मिले भोजन तो भूखे पेट लेटता हूं मै,

जब से होश संभाला, बस अभावों में ही जीना सीखा है,

मुझ जैसे चेहरों पर ही, लेखकों ने बहुत कुछ लिखा है।

अपनों को तिल-तिल तड़पते, अपनी आँखों से देखा है,

इसीलिए आज मेरा हर सवाल, हुक्मरानों से तीखा है।

कब तक रहूं लाचार, भूख से हर पल तड़पता हूं मैं,

बेरोजगार हूं साहब, बस एक काम को तरसता हूं मैं।

खाने को रोटी, पहनने को कपड़े, रहने को मकान चाहिए,

इनको सम्मान से पा सकुं, इसलिए काम चाहिए,

जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए मुझे मेरा मान चाहिए,

मेरे अपनों की जरूरत पूरी कर सके, वो सामान चाहिए,

हर रोज अपनों के लिए, अपना जूता घिसता हूं मै,

बेरोजगार हूं, रोजगार की लाचारी में पिसता हूं मैं ।

जिंदगी को चलाने के लिए चाहिए मान और दौलत,

जिससे मिले मुझे,  और मेरे अपनों को शोहरत,

ना जाने और कितना चाहिए आपको मोहलत,

पुरे हो जाए सपने, खुश हो अपने मेरे बदौलत,

इन सपनों को पूरे करने दर - दर भटकता हूं मै,

बेरोजगार हूं, रोजगार को चहकता हूं मैं ।

कितने दर्द सहकर मेरे अपनों ने पढ़ाया सिखाया है,

नाम - काम करूंगा उनका, मुझपर उम्मीद जताया है,

कौशल प्राप्त करने में मैंने अपना अमूल्य पल लगाया है,

आपके दिलासे के कारण अपना रुपए और समय गंवाया है,

मेरे कौशल का उपयोग हो, ऐसा आपसे उम्मीद करता हूं मैं,

बेरोजगार हूं, रोजगार के खातिर तील - तील मरता हूं मैं ।

ना जाने कितने नेता, अपनों ने उम्मीद बंधाए,

मिल जाएगा मेरा हक की नौकरी, मुझे बताए,

पर कहकर भी अपना वादा क्यों, कोई ना निभाए,

ये तो मेरा काम है, मुझे मेरा हक क्यों मिल ना पाए,

मुझे काम दे दो, भारत निर्माण में योगदान देता हूं मैं,

बेरोजगार हूं, अपने हक की बात कह देता हूं मै।

ना जाने कुछ लोगों को कैसे मिल जाती है,

हमे तो नौकरी की तलाश दर - दर घुमाती है,

लोगों से मांग मांग कर काम, इज्जत घिस जाती है,

फिर भी ना जाने क्यों मुझे शर्म नहीं आती है,

गर करने लगा शर्म तो अपनों को क्या खिलाता हूं मैं,

बेरोजगार हूं, अपने बेबसी की गीत गाता हूं मैं।


अब नहीं चाहिए आश्वासन और झुठी दिलासे,

कब तक रहेंगे मेरे अपने भूखे - प्यासे,

हम भी चाहे अपने देश की चमक को तरासे,

मिले सबको योग्यता से काम, ना हो कोई रुआंसे,

रोजगार के लिए हर पल हाथ मलता हूं मैं,

बेरोजगार हूं, रोजगार की तलाश को चलता हूं मैं।


🙏 जय हिंद 🙏

आपका अपना
अहसास डायरी ✍️


● यह कविता आपको कैसी लगी ?
● बेरोजगारी कैसे खत्म किया जा सकता है ?
● नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें ।


Comments

  1. Anonymous13:29

    🕊️🕊️🕊️

    ReplyDelete
  2. राज13:32

    Education system ko learning system me convert kar do

    ReplyDelete

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