रूह का स्पर्श
★ रूह का स्पर्श ★
सिर्फ लबों का मिलना ही मोहब्बत नहीं होती,
हर छुअन में रूह की इबादत नहीं होती,
पर जब झुकती हैं पलकें और करीब आते हो तुम,
थम जाता है वक्त,
जब धड़कन बन जाते हो तुम।
तुम्हारी लबों पर वो मेरा पहला अहसास,
जैसे तपती धूप में हो ठंडी बूंदों की प्यास,
वो एक छोटा सा पल,
और सब कुछ ठहर गया,
मेरे सूने से जहां में,
जैसे कोई रंग भर गया।
न शब्दों की ज़रूरत है,
न वादों का शोर,
खींच ले जाती है मुझे,
तुम्हारी चाहत की डोर।
आज इस 'किस डे' पर बस इतना ही कहना है,
ताउम्र मुझे तुम्हारी इन साँसों के करीब रहना है।
🙏 जय हिंद 🙏
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