दिल में एक बोझ है कह दूं क्या
★दिल में एक बोझ है ★
(कह दूँ क्या )
(कह दूँ क्या )
मुस्कुरा कर भी बहुत कुछ छुपाती हूं,
कुछ दर्द जो कहे नहीं जाते,
हर बात पे चिड़चिड़ापन सा आता
हैं,
कुछ जख्म जों बस अन्दर ही कैद
रहता है,
पर कोई समझता नहीं,
क्यों दिल भर आता हैं,
जब ख्याल आता है,
हर रोज एक बोझ सा उठाती हूँ,
सोची बहुत बार कह दूँ,
पर फिर रुक जाती हूँ,
कभी गुस्सा तो कभी खामोशी,
मेरी पहचान बन गईं,
किसी कों क्या फर्क पड़ेगा,
यहीं सोचकर बस खामोश रह जाती
हूँ...!
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
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💔💔💔
ReplyDeleteAwesome poetry 👏
ReplyDeleteNice
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