बेनाम इबादत
★ बेनाम इबादत ★
कभी प्यार बाँधा जाता है,
दुनिया के डर से अक्सर,
हर रिश्ता निभाया जाता है,
पर असली इबादत तो,
उस बेनाम मोहब्बत में है,
जहाँ सिंदूर नहीं,
बस रूह से रूह का नाता है...!
मैं जानती हूँ,
एक छत के नीचे हम रह नहीं सकते,
तकदीर की लकीरों को,
हम कभी मिटा नहीं सकते,
पर हर दुआ में तेरा भला,
माँगना दस्तूर है मेरा,
वो रिश्ता है जिसे मैं,
ज़माने को दिखा नहीं सकती...!
दूरी कितनी भी हो,
फिर भी एहसास हमेशा पास रहता है,
बिना किसी हक के भी,
वफा का प्यास रहता है,
किसी कागज़ की मोहर की,
मोहताज नहीं हूँ मैं,
तेरी यादों का ही दिल में,
अब स्थाई वास रहता है...!
सजोया है उस रिश्ते को,
जिसे कोई नाम न मिला,
महक उठी वो बगिया मेरी,
जिसे मंज़िल कभी न मिली,
यही तो वो सुकून है,
जो हर किसी को नसीब नहीं,
तड़प में भी वो मज़ा है,
जो किसी आराम में न मिला...!
न फेरों के बंधन हैं,
न समाज की गवाही है,
पर मेरी हर धड़कन में,
बस तेरी ही परछाई है,
लोग ढूँढते होंगे मंज़िलें,
अपनी मोहब्बत की,
मैंने तो तेरी यादों में ही,
अपनी दुनिया बसाई है...!
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
● क्या आप इस बात से सहमत हैं कि प्यार के लिए किसी सामाजिक मोहर की ज़रूरत नहीं होती ?
● क्या बिना नाम और पहचान वाले रिश्ते, समाज के बंधनों में बंधे रिश्तों से ज्यादा सच्चे हो सकते हैं ?
● क्या 'दूरी' और 'तड़प' वास्तव में किसी रिश्ते की गहराई को और बढ़ा देती हैं ?
● क्या बिना नाम वाले रिश्ते ज़्यादा गहरे होते हैं ?
● आपके लिए 'मुकम्मल प्यार' का मतलब क्या है ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।







♥️
ReplyDeleteHeart touching ♥️
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