मरहम : सिसकियों से सजदा तक (भाग - 2)
★ मरहम - सिसकियों से सजदा तक ★
हक और हमसफर
इजाज़त की क्या बात, ये हक ही तुम्हारा हैं,
अँधेरे रास्तों में, तुम ही तो सितारा हो।
बुझे दीयों को फिर से रोशन कर लो तुम,
किस्मत का पन्ना, चाहों तो फिर भर लो तुम।
गर सांसों में घुटन हैं, तो हवा बन जाऊं मैं,
तुम्हारें हर मर्ज की, दवा बन जाऊं मैं।
खिड़की क्या, पूरा दिल ही तुम्हारा हैं,
इस उलझे हुए जीवन का, तू ही किनारा हैं।
थकी आँखों को अब हकीकत का दीदार मिले,
पुरानी किताबों को, नया सा किरदार मिले।
तुम मरहम बनो, या खुद को सुलझा लो,
बस एक बार मुस्कुरा कर, खुद को सजा लो...!!
To be continued....
🙏 जय हिन्द 🙏
आपका अपना
Ahasas Diary ✍️
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🤗🤗🤗
ReplyDeleteKisne likha hai bhai bahut acha likha h😍
ReplyDeleteShukriya mere Bhai,
DeleteHumari Marham: post 5 bhag me h,, aage ki bhag bhi padhiye, aur humse apna ahasas sajha kijiye,,
Dosto ke sath share bhi kijiye