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मां का आंचल: बचपन की यादें

 

मां का आंचल

बचपन की यादें 

मां के साथ

उंगली पकड़ कर चलना सिखाना,
हर छोटी चोट पर रोना और तेरा दौड़े आना।
मेरे हर सवाल का मीठा सा जवाब थी तू,
मेरे बचपन का सबसे सुकून भरा ख़्वाब थी तू।

मां के साथ सुकून की नींद

जब भी अंधेरे से डर कर मैं रोता,
तेरा हाथ थाम कर ही चैन से सोता।
वो लोरी सुनाकर मुझको सुलाना,
सुबह सवेरे ज़बरदस्ती जगाना,


"देर हो रही स्कूल को" कहकर डराना।
वो गलती पर डांटना, फिर गले से लगाना।
मेरे बस्ते में पराठा और अचार सजाना,
दुनिया का सबसे लज़ीज़ था तेरे हाथ का खाना।


दुनियां की हर धूप में छाँव हैं तेरी,
मेरी हर खुशी, माँ, बस अमानत हैं तेरी।
तूने अपनी खुशियों को हंसकर वार दिया,
मेरे छोटे से संसार को ममता से संवार दिया।


चाहे कितनी भी मुश्किल राहें आ जाएँ,
तेरी दुआओं में वो दम हैं कि आंधियाँ थम जाएँ।
भले ही वक़्त ने मुझको बड़ा कर दिया,
पर तेरे आँचल में आज भी वही सुकून हैं मिलता मां।।

🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना, 
 Ahasas Diary ✍️


  • यह कविता आपको कैसी लगी?
  • क्या इसने आपको भी आपके बचपन की याद दिलाई?
  • नीचे कमेंट्स में अपनी माँ के साथ जुड़ी कोई प्यारी याद ज़रूर साझा करें।

Comments

  1. Anonymous14:09

    I love you maa

    ReplyDelete
  2. Radhey radhey14:31

    Lovely

    ReplyDelete
  3. Anonymous18:09

    🙏

    ReplyDelete
  4. Anonymous23:12

    Maa ki mamta se badhkar kuchh nahi h

    ReplyDelete

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