हमसफर का साया
ज़िन्दगी के सफर में,
मैं साया बनकर रहूँगी,
तुम कहो या ना कहो,
मैं हर मोड़ पर साथ चलूँगी,
तुम्हारी सादगी में वो बात है,
जैसे सुबह की पहली किरण,
तुम महकती हुई एक याद हो,
जिससे रोशन है मेरा आँगन,
ना चाहत सितारों की,
ना चाँदनी का जुनून है,
बस तुम्हारें साथ गुज़रे,
लम्हों में ही सच्चा सुकून है,
तुम्हारी आँखों में डूबूँ तो,
समंदर भी कम लगे,
इनमें छुपी वो मासूमियत,
हर दर्द का मरहम लगे,
जब खिलखिलाकर,
तुम मुस्कुराते हो,
सर्द रातों में भी जैसे,
धूप का अहसास जगे,
तुम्हारी खामोशी भी,
मुझसे बातें हज़ार करती है,
मानो हर धड़कन बस,
तुम्हारा ही इंतज़ार करती है,
वो पुरानी यादें, वो बातें,
वो साथ बिताए पल,
आज भी रूह को छूकर,
दिल बेकरार करती हैं,
लिख दूँ तुम्हें पन्नों पर,
तो स्याही भी महक जाए,
देख ले जो कोई तुम्हें,
तो बस देखता ही रह जाए,
मैं शब्द ढूँढती हूँ,
तुम्हारी रूह को संवारने के लिए,
पर तुम बने हो बस दिल में,
उतर जाने के लिए,
वो कंधा जिस पर सर रख कर,
मैं दुनिया के हर गम भूल जाऊँ,
खुदा से माँगी वो दुआ हो तुम,
जिसे पाकर मैं खुद को पा जाऊँ,
ज़िन्दगी के सफर में,
मैं साया बनकर रहूँगी,
तुम कहो या ना कहो,
मैं हर मोड़ पर साथ चलूँगी...!
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
● क्या आपको भी लगता है कि सच्चा हमसफ़र वही है जो बिना कहे आपकी 'खामोशी' को समझ ले ?
● इस कविता की कौन सी बात सीधे आपके दिल को छू गई ?
● क्या आपके लिए भी साथ बिताए पल ही सच्चा सुकून हैं ?
● क्या आपने कभी किसी की खामोशी को सुना है ?
● क्या आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा है?
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Lovely couple story 👌
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