चेहरे का लिबास
★ चेहरे का लिबास ★
दुनिया को दिखाने को चेहरे पर नक़ाब है,
मेरे अंदर एक दरिया-ए-दर्द बेहिसाब है,
झाँक कर जो देखोगे, रूह कांप जाएगी,
हर सांस में एक अनकही प्यास उभर आएगी...!
खुदा! अब तो सब्र का पैमाना भर गया है,
सीने में दबा दर्द, एक पत्थर सा ठहर गया है,
ये वो ज़हर है जिसे ख़ामोशी से पीते हैं हम,
तन्हाइयों के साये में, रोज़ ही जीते हैं हम...!
राहत की तलाश में, गुज़रते हैं मुद्दत से,
ख्वाहिश थी कि परिंदों सी ऊँची उड़ान भरूँ,
ज़िंदगी की कड़वाहट को हंसी में बदलूँ...!
मगर यादों की धूल ने रास्तों को घेर लिया है,
मायूसी की धूप ने खुशियों को फेर लिया है,
वो सावन के रंगों सा, रूह में समाया जो था,
जिसने खिलती कलियों सा, मन को सजाया जो था...!
ऐ खुदा! उस मुसाफिर को मेरी बंजर ज़मीं पर ला दे,
मेरी फीकी पड़ी रूह में, फिर से रंग सजा दे,
बहुत भारी है ये हँसी, अब ये बोझ सहा न जाए,
मेरी खाली झोली में, वो ख़ुशियाँ फिर लौट आए...!
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
● क्या आपने कभी ऐसा नकाब पहना है ?
● क्या आप भी खामोशी से दर्द सहते हैं ?
● तन्हाई आपको क्या सिखाती है ?
● क्या खुशी का दिखावा सच में भारी है ?
● क्या आपके पास भी ऐसी कोई याद है ?
● क्या आपको भी किसी अपने की तलाश है ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।







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