यादें
★ यादें ★
चाय की प्याली, धूप का टुकड़ा, और यादों का घेरा है,
आज फिर मन के उस आँगन में, बीता हुआ सवेरा है।
पन्नों पर कुछ शब्द बिखरे हैं, कुछ मन के भीतर बाकी हैं,
खिड़की के उस पार खड़ी, मेरी ही कई झाँकी हैं।
कहीं वो बचपन की किलकारी, कहीं वो माँ का साया है,
वक्त ने हमसे जो छीना था, स्मृतियों ने फिर लौटाया है।
कलम रुकी है हाथ में, पर ख्यालों का सफर जारी है,
आज खुद से मिलने की, शायद मेरी बारी है।
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
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यादें ही तो सहारा है
ReplyDeleteYaade jine nhi deti
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