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मुस्कुराहट और हकीकत

 ★मुस्कुराहट और हकीकत★

मुस्कुराते बहुत हो तुम,

कभी असल में खुश भी रहा करो,

दिल मे जो दबी हैं बातें,

वो हमसे बेझिझक कहा करो...!

जब छूट जाए साथ कोई अपना,

या टूट जाए काँच सा कोई सपना,

जब तन्हाई में पड़ जाए तड़पना,

या हालातों की आग में तपना,

तब बेखौफ मुझे याद किया करो,

दिल में दबी बातें, हमसे खुलकर कहा करो...!

जब दुनिया तुम्हें बेवजह रुलाए,

जब गुज़रा कल तुम्हें सताए,

जब कोई सब्र को आज़माए,

या सारा जहाँ ही गलत बताए,

तुम बेधड़क मुझसे मशवरा किया करो,

दिल में दबी बातें, हमसे खुलकर कहा करो...!

गलती हुई तो प्यार से समझाऊँगा,

तुम जैसे भी हो, वैसे ही अपनाऊँगा,

हक़, गुस्सा और अपनापन जताऊँगा,

पर वादा है, हर हाल में साथ निभाऊँगा,

मुझे खुद के करीब महसूस किया करो,

दिल में दबी बातें, हमसे खुलकर कहा करो...!

मुस्कुराते बहुत हो तुम,

कभी असल में खुश भी रहा करो,

दिल में जो दबी हैं बातें,

वो हमसे बेझिझक कहा करो...!




🙏 जय हिंद 🙏


आपका अपना

अहसास डायरी ✍️

● क्या आपको भी कभी ऐसा लगता है कि दुनिया के सामने मुस्कुराना, अपनी उदासी छुपाने का सबसे आसान तरीका है ?

● आपकी जिंदगी में ऐसा कौन है, जिसके सामने आप "बेझिझक" होकर अपने दिल की हर बात कह सकते हैं उन्हें ये पोस्ट टैग करें ?

● कविता की कौन सी पंक्ति आपको सबसे ज्यादा पसंद आई ?

● क्या कोई ऐसी बात है जो आप अक्सर कहना चाहते हैं पर कह नहीं पाते। नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें ?

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