मेरा बिलासपुर
★ मेरा बिलासपुर ★
अरपा की ये लहरें देखो,
जैसे गीत सुनाती हैं,
बिलासपुर की माटी हम पर,
स्नेह सदा बरसाती है,
धीमी-धीमी शाम यहाँ की,
दिल को सुकून दे जाती है,
शहर की ये हलचल भी,
एक राग नया गाती है...!
रतनपुर की पावन छाया,
मन में विश्वास जगाती है,
माँ महामाया के चरणों में,
दुनिया झुकने आती है,
खूंटाघाट की शांत झील,
दर्पण सी जो दिखती है,
सूरज की उन किरणों में,
यादें नई-नई खिलती है...!
बचपन आज भी खेलता है,
शहर के कोने-कोने में,
अपनापन ही मिलता है,
गांधी चौक की रौनक देखो,
जैसे धड़कन धड़कती है,
बिलासपुर की शाम यहाँ पर,
सितारों सी चमकती है...!
शहर का अक्स उभरता है,
सुकून भरी उन शामों में,
मन हर पल निखरता है,
शांत जल की गहराई में,
खुशियाँ जैसे बहती हैं,
बिलासा की गौरव गाथाएं,
हवाएं यहाँ की कहती हैं...!
विकास के इन रास्तों पर,
हम आगे बढ़ते जाते हैं,
पर अपनी पुरानी यादों को,
सीने से लगाए रखते हैं,
सिर्फ एक शहर नहीं ये,
ये रूह का एक ठिकाना है,
बिलासपुर ही अपना घर है,
यहीं उम्र भर मुस्कुराना है...!
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
● बिलासपुर में आपकी सबसे पसंदीदा जगह कौन सी है जहाँ जाकर आपको सबसे ज्यादा सुकून मिलता है ?
● इस कविता की कौन सी लाइन पढ़कर आपको बिलासपुर की अपनी सबसे पुरानी या प्यारी याद ताजा हो गई ?
● शहर के विकास और यहाँ की पुरानी संस्कृति में से आपको क्या चीज सबसे ज्यादा पसंद है ?
● अगर आपको बिलासपुर को सिर्फ एक शब्द में बयां करना हो, तो वह शब्द क्या होगा ?
● रतनपुर, खूंटाघाट या कानन पेंडारी—इनमें से आपकी पहली पसंद कौन सी है ?
● क्या आप बिलासपुर से जुड़ी कोई ऐसी कहानी या अनुभव साझा करना चाहेंगे जो हमेशा आपके दिल के करीब रही है ?







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