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Showing posts from February, 2026
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निंदिया रानी की नाराज़गी

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 ★ निंदिया रानी की नाराज़गी ★ आज पूछ लिया मैंने अपनी निंदिया रानी से, पहले तो तू बिन बुलाए ही आ जाती थी, अपनी मीठी थपकी से मुझे सुलाती थी, सुबह जल्दी उठना है कहकर कानों में चिल्लाती थी, और अपनी बाहों में समेटकर, जन्नत के ख़्वाब दिखाती थी, पर अब क्या हो गया, अब क्यों मुझे एक पल के सुकून को तरसाती हो? मुझसे लिपटकर सोने से अब क्यों कतराती हो...? वो प्यारे सपने, वो प्यार, वो हक़... क्यों अब घंटों मुझे इंतज़ार कराती हो? निंदिया रानी फिर मुस्कराकर बोली: क्यों न मैं तुम्हें अब यूँ ही सताऊं? क्यों फिर से लौटकर तुम्हारे पास आऊं? जब तूने ही मेरा साथ बेदर्दी से छोड़ दिया, तो अब मैं तुझसे वफ़ा क्यों निभाऊं  ? जिस 'काम' की चमक या 'किसी' की याद के लिए तूने मुझे ठुकराया, अब जा उन्हीं से कह दे कि वो तुझे सुला दें, मैं क्यों फिर से अपना प्यार जताऊं  ! वो हक़ जो सिर्फ मेरी थी, तूने किसी और की झोली में डाल दिया, तू जनता था दुनिया में मुझ जैसा वफ़ादार कोई नहीं मिलेगी, फिर भी तूने मेरी वफ़ा का हिस्सा, गैरों के नाम कर दिया...! अब किस मुँह से उन थकी हुई आँखों को सुनहरे ख़्वाब दिखाऊं, देख तोड़ दि...

हमारी पहली मुलाकात

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 ★हमारी पहली मुलाकात ★ कितनी बातें अधूरी थीं, जो आज पूरी हुई हैं, शुक्र है कि खत्म आखिर, ये दूरी हुई है...! आपको सामने देख कर, दिल खिल सा गया, जैसे बरसों पुरानी, कोई अपनी मिल सी गई...! आप जितनी प्यारी हैं, उतनी मीठी बातें आपकी, सुलझा दी आपने आज,अनकही यादें मेरी...! जब आप बोल रही थीं, मैं बस सुनती रही, वो हँसी, वो चहकना, वो दिल को छू लेना, बिना कुछ कहे ही, सब कुछ कह देना...! इंतज़ार लंबा था, पर आज वो भी हसीन लगी, ना जाने कितनी बार वक़्त ने हमें रोका था, पर आज की इस शाम का,अलग ही झोंका था...! लगा ही नहीं कि हम, पहली बार मिले हैं, मुलाकात छोटी थी मगर, यादें बड़ी दे गई, आपकी वो सादगी, मेरे दिल में जगह बना गई...! शुक्र है उस खुदा का, जिसने ये दिन दिखाया, इतनी प्यारी दोस्त से, आखिर आज मिलाया...! ये सिलसिला बातों का,अब यूँ ही चलता रहे, दोस्ती का ये रिश्ता हमारा, हमेशा यू ही बना रहे...! 🙏 जय हिंद 🙏  आपका अपना  अहसास डायरी ✍️  ● क्या आपको कभी किसी से पहली बार मिलकर ऐसा लगा है कि आप उन्हें बरसों से जानते हैं ? ● क्या आपको भी चमक-धमक से ज़्यादा लोगों की सादगी और मीठी बातें पस...

किसी के प्यार में हो रहा हूँ

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किसी के प्यार में हो रहा हूँ ​खुलती हैं आँखें तो एक मुस्कान सजाता हूँ, मन ही मन खुशी का कोई गीत गुनगुनाता हूँ, बाल-मन की उमंग से खुद को नचाता हूँ, और हर बात को हँसी के रंग में बताता हूँ, ​अरे! ये क्या आलम है कि मैं बेहिसाब खुश हो रहा हूँ, बिना किसी वजह के ही अपनी मुस्कुराहटों में खो रहा हूँ...! अब रातें जागती हैं और दिन में चैन से सो रहा हूँ, जागती आँखों से हकीकत में भी ख्वाब सजा रहा हूँ, नादानी में ये कैसा मोहब्बत का बीज बो रहा हूँ, "लगता है" शायद किसी के प्यार में हो रहा हूँ...! अब घंटों खुद ही के खयालातों में सोया रहता हूँ, दिल के जज्बातों की महफ़िल में खोया रहता हूँ, कामों के दरमियाँ भी शरारतें सी करता हूँ, अपनी ही बातों पे मन ही मन मुस्कुराया करता हूँ, अरे! ये क्या हुआ है मुझे, मैं अकेले में मचल रहा हूँ, "लगता है" शायद किसी के प्यार में हो रहा हूँ...! किसी को पाने की एक मीठी सी कशिश रहती है, रूह मेरी अब हर पल खुशियों के दरिया में बहती है, अचरज है कि ये दुनिया कैसे कोई दर्द सहती है, मन कह रहा है कि जी भर के खुशियाँ बाटूँ सबको, सबका दर्द अपना लूँ, म...

लिखा है क्या लकीरों में

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★लिखा है क्या लकीरों में★ लिखा है क्या लकीरों में, मुझे पढ़ना नहीं आता...! तू ही बता दे क्या है लिखा, ओ खुदा मेरे...! बस इतना बता दे मुझे....✍️! जिंदगी ये मेरी है बस इतनी सी, ना जाने क्यों है ये मुझसे ख़फ़ा सी..! कह दे क्यों है ख़फ़ा तू मुझसे, ऐ जिंदगी...! ना जाने क्यों है इतनी उदासी, जिंदगी से मेरी...✍️! पूछती हूँ खुद से, क्या कमी रह गई है...! मेरी इन आँखों में, क्यों  नमी रह गई है...! सब कुछ तो किया मैंने, जो तूने कहा था...! फिर क्यों मेरी खुशियाँ, कहीं थमी रह गई हैं...! ओ खुदा मेरे...! बस इतना बता दे मुझे....✍️! पत्थर की बन गई हूँ, अब रोया नहीं जाता...! ये दुखों का जो समंदर है, अब सोया नहीं जाता...! तू तो सबका खुदा है, फिर मेरा क्यों नहीं होता...! मेरी तन्हाई देख कर, तेरा दिल क्यों नहीं रोता...! ओ खुदा मेरे...! बस इतना बता दे मुझे....✍️! अब और नहीं सह सकती, ये खामोश सितम...! तोड़ दे ये साँसें, या मिटा दे ये गम...! बिखर चुकी हूँ मैं, जैसे कांच का टुकड़ा हो...! अब तू ही बता, कैसे जोड़ूँ ये मुखड़ा...! ओ खुदा मेरे...! बस इतना बता दे मुझे....✍️! चाहती हूँ, कि तू भी मेरा हाल देख ले......

तू आईना है मेरे अहसांसो की

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  तू आईना है मेरे अहसांसो की तू चांद है मेरी रातों की, तू भाव है मेरी बातों की, तू बूंद है बरसातों की, तू प्यार है, जज्बातों की, और क्या बोलूं तुझे मै, तू आईना  है, मेरे अहसासो की...! आंख है तेरी नशीली अदाओं वाली, बाल है काली घटाओं वाली, आवाज है मदहोशी लाने वाली, बिंदिया है राह भटकाने वाली, और क्या बोलूं तुझे मैं, तू आईना है, मेरे अहसांसो की...! होंठ है या पंखुड़ी है गुलाब की, चेहरा है या नशा है शबाब की, तन है या रचना है ख़्वाब की, सवाल है या जवाब है लाजवाब की, और क्या बोलूं तुझे मै, तू आईना है मेरे अहसांसो की...! तू प्यास है मेरे सूखे लबों की, तू आस है मेरे कल के ख्वाबों की, तू महक है चमन के फूलों की, तू राहत है थकी हुई साँसों की, और क्या बोलूं तुझे मैं, तू आईना है मेरे अहसांसो की...! खामोशियाँ हैं तेरी गुफ़्तगू जैसी, साँसें हैं तेरी ताज़ा खुशबू जैसी, नज़रें हैं तेरी पाक इबादत जैसी, चाहत है तेरी रूह की चाहत जैसी, और क्या बोलूं तुझे मैं, तू आईना है मेरे अहसांसो की...! मुझमें जो बाकी है, वो तेरा ही हिस्सा है, मेरी हर एक कहानी का, तू ही तो किस्सा है, मैं खुद को देखूं, तो तू नज़र आती...

हिंदी वर्णमाला (बाल गीत)

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  हिंदी वर्णमाला  (बाल गीत) अ से *अनार* हम लाते है, आ से *आम* हमे भाते है, इ से खट्टी हो गई *इमली* , ई से मीठी हो गई *ईख* , ऋ से *ऋषि* के करते पूजा, ए से *एकलव्य* के जैसे वीर ना दूजा, ऐ से हमे *ऐनक* सुझा, ओ से *ओखली* में कुटाई करते, औ से *औरत * की महानता गढ़ते, अं से *अंगूर* हम रोज खाते है, अ: से विसर्ग  हम लगाते है। 🙏 जय हिंद 🙏 आपका अपना अहसास डायरी ✍️ ● यह बाल गीत आपको कैसी लगी ? ● आपको इमली, अनार, आम, अंगूर, इनमे से क्या पसंद हैं ? ● नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें।

मामा जी का गांव (बाल गीत)

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  मामा जी का गांव  (बाल गीत) नानी के गांव हम जाते है, हलुवा पुढ़ी वहां खाते है, नाना, कहानी सुनाते है, नानी, गोद में सुलाते है, मामा, जी हमे सैर कराते है, मौसी, अच्छी बाते बताते है, दोस्त, नए खेल सिखाते है, छुट्टी के दिन हम बिताते है। 🙏 जय हिंद 🙏 आपका अपना अहसास डायरी ✍️ ● यह बाल गीत आपको कैसी लगी ? ● क्या आपको भी पसंद है मामा गांव में छुट्टियाँ बिताना ? ● नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें।

मेरी रूह और तुम

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★ मेरी रूह और तुम ★ लोग तो बातें बनाते ही थे हमारे नाम की, बदनाम तो हम हमेशा से थे आपकी मोहब्बत में, मगर पहले सिर्फ दिल्लगी थी, अब जान पर बन आई है, अभी तो बस समझ आई है, कि मोहब्बत होती क्या है...! अजीब दस्तूर है तुम्हारी वफ़ाओं का भी, फासले बढ़ा लिए पर धड़कनों से जाते नहीं, रूह में बसे हो और खुद को अजनबी कहते हो, ये कैसी बेरुखी है कि पहचानते तक नहीं मुझे, जबकि आईना देखूँ तो अक्स तुम्हारा ही दिखता है...! मैं चाहूँ भी तो तुम्हें खुद से जुदा नहीं कर सकती, उस खुशबू को मिटाना मेरे बस की बात नहीं, मैं मर भी जाऊँ तो मेरी कब्र से वही महक आएगी, जिसमें आपकी मोहब्बत आज भी महकती है...! 🙏 जय हिंद  🙏  आपका अपना  अहसास डायरी ✍️  ● क्या आपने कभी किसी को इतनी शिद्दत से चाहा है कि खुद में भी वही नजर आने लगे ? ● क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि कोई रूह में तो बसा हो, पर सामने अजनबी बन कर खड़ा हो ? ● क्या दूरियां वाकई प्यार कम कर पाती हैं ? ● क्या प्रेम मृत्यु के बाद भी जीवित रहता है ? ● मोहब्बत में दुनिया की बातों से डरना चाहिए या अपनी रूह की सुननी चाहिए ? ● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास...

भ्रष्टाचार का अंधेरा

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 ★भ्रष्टाचार का अंधेरा★ बड़े-बड़े वादे करके, सबने कुर्सी पाई है, मगर देश की किस्मत में, बस धोखा ही नसीब में आई है, नेता जी मुस्कुराते हैं, महलों के अंदर बैठ के, जनता यहाँ सिसक रही, महँगाई की मार लपेट में...! गरीबों का पसीना था, जो सरकारी में जमा था, लुटेरों ने उसे लूटा, जैसे वो कोई इनाम था, कहीं सोने की चोरी है, कहीं वतन को बेचा है, क्या इसीलिए शहीदों ने, अपना खून मातृभूमि पर सींचा है...! दफ्तर जाओ तो, बिना दाम के काम नहीं होता, बेईमानों के चेहरे पर, अब शर्म का नाम नहीं होता, फाइलें दबी रहती हैं, जब तक जेब गरम ना हो, क्या इंसानों के दिल में, अब थोड़ी भी शरम नहीं हैं...! पर याद रहे ये बात उन्हें, जो देश को खा रहे हैं, वे अपनी ही कब्र यहाँ, खुद ही खोदते जा रहे हैं, जब जागेगी ये देश की जनता, तो सिंहासन भी हिलेगा, हर एक बेईमान का यहाँ, फिर कच्चा चिट्ठा खुलेगा...! भारत देश हमारा प्यारा है, इसे हमें बचाना होगा, भ्रष्टाचार को जड़ से, अब हमें मिटाना होगा...! 🙏 जय हिंद 🙏 आपका अपना अहसास डायरी ✍️ ● नेता जी वोट मांगते समय तो हाथ जोड़ते हैं, पर जीतने के बाद गायब क्यों हो जाते हैं? क्या आपके इलाके...