ख़ामोश इकरार
ख़ामोश लबों पर चाहत का इकरार रहने दो,
बस अपनी इन नज़रों को मेरा गु़नहगार रहने दो,,
करीब आओ कि साँसों की तपिश महसूस हो सके,
आज दरमियाँ हमारे, बस ये प्यार रहने दो,,
महकती रहे मेरी रूह तुम्हारी इन यादों से,
मुझ पर सरे-आम अपना ऐतबार रहने दो,,
उलझने दो मेरी उँगलियों को तेरी जु़ल्फों में,
वक़्त ठहर जाए, बस यही इंतज़ार रहने दो,,
हल्की सी ये छुअन और नज़रों का ये मिलन,
खुदा की हम पर रहनुमा रहने दो,,
ना मैं कुछ कहूँ, ना तुम कुछ कहो आज,
धड़कनों को ही दिल का हाल ऐ बयां करने दो,,
हमारे बीच सिर्फ और सिर्फ बेइंतहा प्यार रहने दो।।
🙏 जय हिंद 🙏
अहसास डायरी ✍️
● क्या आपको भी लगता है कि लफ्जों से ज्यादा खामोश निगाहें हाल-ए-दिल बयां करती हैं ?
● इस कविता की कौन सी पंक्ति सीधे आपके दिल को छू गई ?
● क्या आपके पास भी कोई ऐसी याद है जो आपकी रूह को महका देती है ?
● क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि बिना कुछ कहे धड़कनों ने सब कह दिया हो ?
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