यादों की होली दोस्ती के रंग
यादों की होली - दोस्ती के रंग
कितनी प्यारी थी वो होली,
और कितना प्यारा वो साथ था,
सच कहूँ तो मेरी ज़िंदगी का वो सबसे,
हसीन अहसास था,
संध्या का वो चिकन खाना,
जैसे बरसों की भूखी हो,
हंस-हंस के पागल होना उसका,
जैसे भांग के नशे में डूबी हो...!
वो हंसी उसकी रुकती न थी,
हम सब भी खिलखिलाते थे,
रंगों के उस शोर में,
हम अपनी ही धुन में गाते थे,
आशा तेरे घर की वो आँगन,
जहाँ खुशियों का पहरा था,
तेरी दोस्ती का रंग तो,
गुलाल से भी ज्यादा गहरा था...!
याद है हमें वो सेल्फी लेना,
वो अजीब-अजीब से पोज बनाना,
कभी मुंह बिगाड़ना, कभी हंसना,
और फिर जोर से खिलखिलाना,
वो तस्वीरें आज भी फोन में नहीं,
सीधे दिल में रहती हैं,
हमारी उस पागलपंती की गवाही,
वो फोटो आज भी देती हैं...!
आशा तेरी माँ के हाथों का वो खाना,
जैसे कोई जादू हो,
महंगे मसालों से ऊपर,
उनमें ममता की खुशबू हो,
वो पकवान वो मिठास,
और वो घर का अपनापन,
उसी में तो बसता है सुकून,
उसी में है सारा जीवन...!
वो दीदी के संग शरारतो वाली मस्ती,
को गहरे रंग लगाना ऐसा लगा कभी छूटेगा नहीं,
रास्ते में बच्चों का गुब्बारों से हमें भिगोते जाना,
सब याद है मुझे,वो हसीन लम्हा,
वो खूबसूरत दिन,
अधूरा सा लगता है,
अब तो ये सफ़र तुम दोनों के बिन...!
जब घर आई मैं लौटकर,
तो रूह मेरी वहीं रह गई थी,
आशा की मुस्कान और संध्या की मस्ती,
आँखों में बह रही थी,
तब समझ आया कि वो रौनक,
रंगों के त्यौहार में न थी,
मेरे चेहरे की वो सच्ची खुशी,
तुम सहेलियों के प्यार में थी...!
वो गुलाल का रंग तो पानी से छूट गया,
पर तुम्हारी दोस्ती का रंग रूह तक उतर गया,
मिले तो थें हम सिर्फ होली खेलने के बहाने,
पर समेट लाए पूरी ज़िंदगी के सबसे
हसीन खज़ाने...!









होली की हार्दिक शुभकामनाएं
ReplyDeleteHappy holi
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