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तेरी 'हाँ' का इंतज़ार

 

★ तेरी 'हाँ' का इंतज़ार ★

मृगनयनी से तेरे ये नयन,

देख जिन्हें मैं भूलूँ सारा जहान,

काले, लंबे और घने तेरे बाल,

मिलोगे क्या?—मुझसे करें ये सवाल...!

चाँद सी चमके बिंदिया तुम्हारी,

छीन ली जिसने रातों की निंदिया हमारी,

शहद से मीठे ये होंठ तुम्हारे,

बस इन्हें ही निहारे दिल ये बेचारे...!

कांच सी सुंदर काया है सनम,

देख जिसे थम जाते हैं मेरे कदम,

अब तो बस तेरी 'हाँ' का इंतज़ार हैं,

पल-पल बढ़ती जाती है ये बेकरारी हैं...!

तुम बिन रहा न जाए अब अकेले,

क्या शाम और क्या सवेरे,

आओ कि अब हम एक हो जाएँ,

उम्र भर के लिए एक-दूसरे के हो जाए...!


🙏 जय हिंद 🙏 


आपका अपना 

अहसास डायरी ✍️ 


● इस कविता की कौन सी पंक्ति आपको सबसे ज्यादा पसंद आई ? 

● क्या आपने भी कभी किसी की आँखों में पूरा जहान भुलाया है ? 

● मृगनयनी या कांच सी काया—आपकी नजर में खूबसूरती की सबसे सही परिभाषा क्या है ?

● अपनी पसंद की कोई एक 'शायरी' या 'पंक्ति' नीचे कमेंट करें जो इस कविता से मेल खाती हो ?

● इंतज़ार की बेकरारी बड़ी होती है या मिलन की खुशी ? 

● किसे याद करके ये पंक्तियाँ आपके दिल को छूती हैं ? (उन्हें टैग करें या दिल वाला इमोजी भेजे) 😍❤️

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें। 


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