नारी: सृष्टि का आधार
★ नारी: सृष्टि का आधार ★
तुम मात्र कोमल देह नहीं,
तुम आदि शक्ति का मान हो,
इस नीरस सूनी धड़कन में,
तुम ही तो जीवन-प्राण हो,
तुम केवल घर की शोभा नहीं,
तुम जग का आधार बनी हो,
तुम काल की गति को मोड़ने वाली,
एक सुंदर अवतार बनी हो...!
कभी माँ बनकर आँचल से,
तुमने ममता को सींचा है,
कभी बहन बन रक्षा-सूत्र से,
भाई का भाग्य निखारा है...!
कभी पत्नी बन हर बाधा में,
तुमने साथ निभाया है,
हर रिश्ते की तपती धूप में,
तुम शीतल साया बन आई हो...!
तुमने बाधाओं को चीरा है,
नभ में अपने पर फैलाए हैं,
कल तक जो बंद दरवाजे थे,
वहाँ आज तुम्हारे साये हैं,
तुम गिरकर फिर संभलना जानती हो,
तुम तपकर सोना भी बनती हो,
जो हार न माने कभी पथ पर,
तुम वो अटूट नियति हो...!
क्यों बाँधें तुम्हें एक दिन में,
हर दिन ही तुम्हारा सम्मान रहे,
तेरे चरणों की धूल जहाँ हो,
वह आँगन स्वर्ग समान रहे,
नारी तुम केवल नाम नहीं,
तुम सृजन का पूरा संसार हो,
इस सृष्टि की हर एक धड़कन का,
तुम ही तो असली सार हो...!
इसी से महकता घर-आँगन,
इसी से जग की शान है,
जहाँ मिले स्नेह और आदर इसे,
वहाँ देवों का वास होता है,
नारी के बिना तो ये संसार,
बस मिट्टी का एक श्मशान है...!
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
● नारी शक्ति को आप एक शब्द में कैसे परिभाषित करेंगे ?
● आपके जीवन की सबसे प्रेरणादायक महिला कौन हैं ?
● क्या आपको लगता है कि समाज में नारी का सम्मान बढ़ा है ?
● नारी के बिना क्या यह संसार संभव है ?
● एक ऐसी बात जो आप हर महिला से कहना चाहेंगे ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।








नारी तू महान है
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