ज़हर-ए-जुदाई
★ ज़हर-ए-जुदाई ★
( एक प्रेम कहानी )
सब कुछ पास है मेरे, बस एक तुम्हारी कमी है,
होठों पर झूठी हंसी, और आँखों में नमी है,
कभी-कभी लगता है कि सब कुछ छोड़ कर चला जाऊं,
पर तुम्हारा चेहरा याद आते ही, मैं फिर से रुक जाता हूँ...!
तुम जो सामने आ जाओ, तो सारे दर्द भूल जाता हूँ,
जैसे तपती धूप में, मैं ठंडी छाँव पा जाता हूँ,
तुम्हारे बिना एक पल भी, अब काटा नहीं जाता,
कभी लगता है खुद को मिटा दूँ,
पर तुम्हारी आँखों की चमक याद आ जाता हैं,
ये जुदाई का ज़हर, मुझसे और पीया नहीं जाता...!
कैसे समझाऊँ तुम्हें कि तुम मेरे लिए क्या हो,
मेरे सूखे हुए जीवन में, तुम बारिश की दुआ हो,
लोग कहते हैं कि लड़के रोया नहीं करते,
पर सच तो ये है कि हम चैन से सोया नहीं करते...!
तुम्हारी याद आती है, तो दम घुटने लगता है,
तुम्हारे बिना ये जहाँ, मुझे वीरान नज़र आता है,
लौट आओ ना, कि ये साँसें अब थमने लगी हैं,
तुम्हारी कमी अब मुझे, अंदर से सताने लगी है...!
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
● क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा है, जिसका चेहरा याद आते ही आपके कदम रुक जाते हैं ?
● क्या आपने भी कभी किसी की कमी को "ज़हर" की तरह महसूस किया है ?
● लड़के रोया नहीं करते—क्या आप इस बात से सहमत हैं या यह सिर्फ एक बोझ है ?
● क्या कभी ऐसा हुआ है कि सब कुछ पास होते हुए भी आपको सब कुछ अधूरा लगा हो ?
● जुदाई या इंतज़ार—इन दोनों में से ज्यादा दर्दनाक क्या है ?
● क्या प्यार में "झूठी हंसी" हँसना मजबूरी बन जाता है ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।






Baat to dil ki h, dil tak jayegi
ReplyDeleteSo nice
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