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'हम' का नया सवेरा (part - 3)

★ 'हम' का नया सवेरा ★

आपकी आँखों के आँसू, मेरी रूह को भिगो गए,

जो कल तक पराये थे, आज फिर अपने हो गए,

माना कि इस मकान को 'घर', सिर्फ आपने बनाया है,

मेरी हर एक कामयाबी में, बस आपका ही साया है...!

अब फोन की वो आभासी दुनिया, पीछे छूट जाएगी,

बातों की मीठी खनक, अब घर में गूँज पाएगी,

न सम्मान सिर्फ साल भर का, न तोहफों का शोर होगा,

अब हर दिन, हर लम्हा, बस हमारा ही दौर होगा...!

आप बेज़बान नहीं, मेरी ज़िंदगी की आवाज़ हैं,

आपके हर एक सपने पर, अब मुझे भी नाज़ है,

न कोई 'फरमान' होगा, न ऊँचे महलों की बात,

बराबरी के हक से, थामूँगा अब मैं आपका हाथ...!

वो तूफान जो अंदर था, उसे बाहर न आने देंगे,

आदर और अनुराग की चादर, अब मिलकर हम बुनेंगे,

'मैं' और 'तुम' की ज़ंजीर से, 'हम' को बाहर लाते हैं,

चलो, उसी पुराने प्यार को, फिर से नया बनाते हैं...!

पुराने ज़ख्म भरेंगे, नए वादों के मरहम से,

रिश्ता ये फौलाद बनेगा, अब प्रीत के संगम से,

उपेक्षा की वो रात गई, अब प्यार का उजाला है,

देखो 'आशा' आपके सब्र ने, फिर घर को संभाल डाला है...!



🙏 जय हिंद 🙏 


आपका अपना 

अहसास डायरी ✍️ 


● इस पूरी कविता में आपको कौन सी लाइन सबसे ज्यादा दिल को छू लेने वाली लगी ?

● 'मैं' और 'तुम' से ऊपर उठकर 'हम' बनने की बात आपको कैसी लगी ?

● फोन की आभासी दुनिया को छोड़कर अपनों को समय देने की बात कही गई है,इस पर आपके क्या विचार हैं ?

● क्या आपको लगता है कि किसी भी रिश्ते को 'घर' बनाने के लिए बराबरी का हक सबसे जरूरी है ?

● क्या बीते हुए कल की कड़वाहट को भूलकर एक नई शुरुआत करना ही सच्ची समझदारी है ?

● एक साथी के लिए इससे सुंदर सम्मान और क्या हो सकता है ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

Comments

  1. बुलबुल09:54

    Humari milan ki samay ka intjar h

    ReplyDelete
  2. Varsha16:06

    Respect jaruri hai

    ReplyDelete
    Replies
    1. Anonymous21:23

      Respect se hi to rishte bante h

      Delete
  3. Rama22:38

    Lovely poetry 💕

    ReplyDelete

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