घबराहट :- मन की एक हलचल
★ घबराहट मन की एक हलचल ★
दिल में मची है एक अजीब सी हलचल,
साँसों में जैसे घुल गया हो बेचैन कल,
ख्वाबों के गलियारों में सन्नाटा है छाया,
अनजाने से एक डर ने, घेरा है लगाया...!
सामने आ खड़ा होता है डर बनकर एक बाधा,
कल की फिक्र में डूबा आज का हर शोर है,
सवालों के चक्रव्यूह में उलझा मन का छोर है...!
पर ठहरूँगी नहीं, ये धड़कन जो ज़ोरों से धड़कती है,
ये तो बस अनहोनी की आहट मात्र से डरती है,
हकीकत के आईने में तो अभी सब कुछ शांत है,
ये बेचैनी तो बस मन के भीतर का एक भ्रांत है...!
अब गहरी एक साँस भरूँगी, आँखें मूँदूँगी,
घबराहट की इस कमज़ोर डोर को हिम्मत से तोड़ूँगी,
वक्त की ये लहरें भी आखिर किनारा पाएँगी,
धैर्य की किरणें ये गहरा अंधेरा मिटाएँगी...!
मैं कोई बेजान पत्थर नहीं, बहती एक धारा हूँ,
खुद पर यकीं है मुझे, मैं अपना ही सहारा हूँ,
ये पल भी ढल जाएगा, ये बादल भी छँटेंगे,
हौसलों के आगे ये सारे तूफान सिमटेंगे...!
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
● जब आप बहुत ज्यादा घबराहट महसूस करते हैं, तो उसे शांत करने के लिए आप सबसे पहले क्या करते हैं ?
● क्या आपके जीवन में कभी ऐसा समय आया है जब डर के बावजूद आपने आगे बढ़ने का फैसला लिया हो ? अपना अनुभव साझा करें।
● क्या आप मानते हैं कि घबराहट अक्सर हमारे मन का एक 'भ्रम' होती है, जैसा कि कविता में कहा गया है ?
● यदि कोई दोस्त इस समय घबराहट महसूस कर रहा हो, तो आप उसे हिम्मत देने के लिए क्या कहेंगे ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।







Bahut sundar kavita ghabrahat
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