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रेल चली (बाल गीत)



रेल चली

 (बाल गीत)

रेल चली भाई रेल चली,

छुक - छुक रेल चली,

गोल - गोल है उनके पहिए,

पटरी पर दौड़ते क्या कहिए,

नदी, नाले, जंगल और पहाड़,

चलते पो - पो की करते दहाड़,

देखो झांक रहे है हमारे यार,

होकर रेल के डिब्बे में सवार।


🙏 जय हिंद 🙏


आपका अपना

अहसास डायरी ✍️


● यह बाल गीत आपको कैसी लगी ?

● क्या आपको भी मेरी तरह रेल की सवारी पसंद है?

● नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें।

Comments

  1. Anonymous15:36

    छुक छुक रेल चली

    ReplyDelete

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