मिथिला की पुकार भ्रष्टाचार का साया
★ मिथिला की पुकार भ्रष्टाचार का साया ★
जहाँ हिमालय की चोटी पर,
सूरज पहले आता है,
बुद्ध की इस धरती से,
शांति का संदेश जाता है,
पशुपति की पावन भूमि,
और जनकपुर की शान,
कितना सुंदर, कितना प्यारा है,
मेरा नेपाल महान...!
जहाँ गूँजती है आज भी,
मिथिला की वो वाणी,
जहाँ रची गई थी सिया-राम की,
अमर प्रेम कहानी,
जनकपुर का वो आँगन,
जानकी का वो धाम,
भक्ति और शक्ति का जहाँ,
बसता है पावन धाम...!
गँगासागर की लहरों में,
और धनुषा की इस धूल में,
एक लहरे उठती है आज,
भ्रष्टाचार की शूल में,
रेल की पटरी बिछी तो सही,
पर विकास कहाँ ठहरा है,
सड़कों के इन गड्ढों पर,
नेताओं का पहरा है...!
परिक्रमा की राहों में,
जब धूल उड़ती दिखती है,
लगता है हर योजना यहाँ,
रुपयों में ही बिकती है,
बाढ़ आए तो राहत का,
पैसा रस्ते में खो जाता है,
गरीब का कच्चा घर,
हर साल बह जाता है...!
मधेश की इस धूप में,
किसान जब जलता है,
तब कमीशन का काला धन,
महलों में पलता है,
मिथिला की कला, संस्कृति,
सब गौरव तो महान है,
पर सिस्टम की सुस्ती ने,
कर रखा इसे हैरान है...!
खाद मिले न खेती को,
न बीमार को दवाई मिले
कमीशन की इस दुनिया ने,
हर तरफ मचाई तबाही है,
देश प्रेम की बातें बस,
अब रह गई हैं सरकारी,
जनता की हर उम्मीद यहाँ,
लगती अब तो बच्ची है,
युवा यहाँ से उड़ जाते हैं,
परदेस की उन गलियों में,
क्योंकि भ्रष्टाचार ने आग लगा दी,
अपनों की फुलवारियों में...!
जागो जनकपुर के वीरों!
अब अपनी आवाज़ उठाओ,
धनुष उठाकर फिर से तुम,
ये अंधियारा मिटाओ,
भ्रष्टों को अब धूल चटाकर,
सुशासन को लाना है,
जनकपुर की इस धरती को,
फिर स्वर्ग सा सजाना है...!
🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना
अहसास डायरी ✍️
● बारिश में जनकपुर की सड़कों पर नाव चलानी चाहिए या गाड़ी ? 🚣♂️
● क्या हमारे नेताओं को सड़कों के गड्ढे डिजाइन लगते हैं या सच में दिखाई नहीं देते ? 😎
● जब युवा परदेस की गलियों में अपनी उम्र खपा देते हैं,तो क्या सिर्फ उनका परिवार टूटता है या मिथिला का भविष्य भी ?
● मिथिला की पेंटिंग और संस्कृति पूरी दुनिया में मशहूर है,लेकिन क्या यहाँ के कलाकार और किसान सच में उस गौरव के अनुरूप जीवन जी पा रहे हैं ?
● क्या आप आने वाली पीढ़ी को एक समृद्ध जनकपुर देंगे या भ्रष्टाचार के गड्ढों में दबा हुआ शहर ?
● नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें ?









Jai nepal 🇳🇵
ReplyDeleteThis is how the leaders of this place change the leaders who eat all the country.
ReplyDeleteBahut sundar
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