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कुछ कहना हैं इस नादान को (Propose day)

★कुछ कहना है इस नादान को★

कुछ कहना है इस नादान को,

दुनिया की रीत से अनजान को,,

दिल और दिमाग के बीच फंसा,

खोजने लगा हूं, तुम्हारी पहचान को,,

भोली सूरत, चंचल मन, और मुस्कुराहट,

भाने लगा है मुझ नन्ही सी जान को,,

कुछ हो रहा है शायद मुझको,

भूलने लगा हूं दुनिया जहान को,,

खोया रहता हूं खयालातों में,

डरता है खोलने से जुबान को,,

कुछ कहना था, खामोशी समझ जाओ,

अपना लो, कान्हा के लाडले युवान को,

खामोशी पढ़ सको तो पढ़ लो मेरी आँखों से,

जो लफ्ज़ नहीं कह पाए, वो शब्द बन कर निकले हैं।


🙏जय हिन्द🙏


आपका अपना
अहसास डायरी ✍️

● यह कविता आपको कैसी लगी ?
● आपने अपना 🌹 दिवस कैसे मनाया ?
● आपको भी किसी से कुछ कहना हो तो कह दीजिए इस प्रपोज डे पर। 
● क्या आप भी किसी को प्रपोज करना चाहते है?
● नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें।


Comments

  1. Radhey radhey06:30

    ❣️❣️❣️

    ReplyDelete
  2. Anonymous16:57

    😍

    ReplyDelete
  3. Rj Aabhash18:22

    Recognize your love in time, otherwise time will make it someone else's.

    ReplyDelete

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