कलम की पुकार और किताबों का संसार
★कलम की पुकार और किताबों का संसार★
फिर थामने को हाथ, कलम मुझे बुलाती है,
वो पुरानी दोस्ती, फिर से याद आती है,
बंद किताबों की धूल, अब हटने को बेताब है,
उभर रहे वो अहसास, जैसे कोई ख्वाब है,
जज्बात कलम से कागज़ पर, कोई उतारने वाला हो,
आज की, कल की, और बीते हर एक पल की,
दास्तानें इनमें ज़िंदा हैं, खुशियों और हलचल की,
इन पन्नों ने प्यार और दर्द, दोनों को सजाया है,
किताबें कुछ कहना चाहती हैं,
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं,
परियों के किस्से, बचपन की यादें, फिर से कहने को,
इनमें खेत लहराते हैं, इनमें हौसले जगते हैं,
उम्मीदों के दिए यहाँ, बुझकर भी जलते हैं,
यहाँ मछली भी रानी है, और चिड़िया भी चहचहाती है,
ये जीना भी सिखाती हैं, ये उड़ना भी सिखाती हैं,
इनमें सुबह की रौशनी है, और रातों की ख़ामोशी हैं,
ये तोड़ देती हैं मन की, हर एक मदहोशी,
किताबें कहती हैं "मैं हर राह में तुम्हारे साथ हूँ,
तुम अकेले नहीं मुसाफ़िर, मैं थामे तुम्हारा हाथ हूँ।"
🙏 जय हिंद 🙏
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अहसास डायरी ✍️
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Beautiful line I love books
ReplyDeleteBooks reading my hobbies 📖 📕 beautiful thoughts ✨️
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