सुकून : अधूरी इश्क़
★ सुकून ★
अधूरी इश्क़ की दास्तां
महसूस तुम्हें रोज करतीं हुँ,
तुम भी तो मुझे हर रोज,
महसूस करते होगे ना,
यादों में, ख़्यालों में,
हर लम्हां साथ होते हों,
रातों में, नींदो में,
हर लम्हां जगाते हो,
उलझन में, सूकून में,
हर लम्हां साथ होते हों,
बीते कल की यादों में,
आज भी खोई हूँ,
आने वाला कल भी,
मुझ पे हँसता हैं,
और कहता है छोड़ उन यादों को,
और चल आगे बढ़ मेरे साथ,
कदम से कदम मिला कर,
कैसे समझाऊ उस कल को,
बीते हुए कल ने,
मेरी जिंदगी छीन ली,
कैसे चलूं मैं तुम्हारें साथ,
कदम से कदम मिला कर,
क्यूँकी मुझे पता हैं,
मेरा सूकून तो,
आज भी कल भी वहीँ हैं...!
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