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रिश्ते की उलझन : दोस्त या प्यार

 


रिश्ते की उलझन.....

दोस्त या प्यार

आहिस्ता-आहिस्ता दिल, किसी पर खो रहा है,
शायद मुझे भी किसी से, इश्क हो रहा है।
उनकी हर एक बात दिल में, गहरा घर कर जाती है,
जरा सी बेरुखी उनकी, मन रुआँसा कर जाती है।
दिन भर बातें करना और मिलने को मचल जाना,
उनकी यादों के साये में, बस यूँ ही चहक जाना।
पर आज भी लब खामोश हैं, कुछ कह नहीं सकता,
डरता हूँ कि दोस्ती में, नया रिश्ता जोड़ नहीं सकता।


ये डर गहरा है कि कहीं, अपना यार न खो दूँ,
इश्क जाहिर करने की जिद में, दिलदार न खो दूँ।
वो क्या सोचेंगे, क्या मालूम—बस इसी बात से डरते हैं,
मेरे मन में छिपे प्यार को, हम पर्दे में ही रखते हैं।


चलो दोस्ती का ये खूबसूरत रिश्ता ही निभाते हैं,
हमारा इश्क, हमारी चाहत, खुद तक ही छिपाते हैं।
वो साथ रहे, बस पास रहे, यही काफी है जीने को,
दोस्ती का नाम देते हैं, इस धड़कते हुए सीने को।।

🙏 जय हिंद 🙏
आपका अपना 
Ahasas Diary ✍️ 

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Comments

  1. Anonymous07:03

    Kya bat h hero...mja aa gya

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  2. Asha Shah14:13

    Nice ❤️

    ReplyDelete
  3. राधे राधे18:10

    कह दे जिसे कहना है

    ReplyDelete
  4. Anonymous05:54

    Ishaq ya dosti, kasmkash gajab ki h, ek khoyega to dusra payega, koshish karo

    ReplyDelete
  5. Rajnish14:59

    Pyar to unhe bhi hogi, tabhi to sath h

    ReplyDelete

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