प्यार हो गया : मोहब्बत की आरजू
प्यार हो गया
मोहब्बत की आरज़ू
आज फिर मुझे चांद की दीदार हो गया,
ना करते हुए भी रब पे ऐतबार हो गया,,
लाख मना किया था इस पागल दिल को,
फिर भी इस पागल को उनसे प्यार हो गया,,
सोचा था नहीं करूंगा मोहब्बत कभी किसी से,
पर उनको देखकर दिल बेहाल हो गया,,
आज ही कर दुं उनको दिल की हाल ये बयां,
पर करूं कैसे, दिल का ये सवाल हो गया,,
खोना नही चाहता मैं अपनी प्यारी दोस्त को,
कैसे बात करूं, सोच सोच कर परेशान हो गया,,
मुझे कुछ सूझ ही नहीं रहा कैसे जाकर बोलूं,
हे हिरणी, तू मेरी जिन्दगी, तू ही मेरी जान हो गया।।
🙏जय हिंद 🙏
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Nice
ReplyDeleteBeautiful poetry
ReplyDeleteMat kar Mohabbat bahut pachhtayega
ReplyDelete❣️❣️❣️
ReplyDeleteNice poem
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ReplyDelete🤗🤗🤗
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